कभी खुशियाँ ढूँढी तो गम पाई,
कभी मुस्कुराए तो आँखों में आँसू आई।
सजाई हर वक्त ज़िंदगी मायूस है क्यों करती है, (hindi shayeri)
मुझे न जाने किस की बद्दुआओं ने मुझे इतना रुलाया।
ऐ ज़िंदगी मुझे इतना न सता,
ऐ ज़िंदगी मुझे इतना न रुला।
ख्वाब बन के हमें न सता,
सपने टूटते आए हैं मेरे, (hindi shayeri)
ज़िंदगी ख्वाब इतने न दिखा।
ज़िंदगी हमें ऐसे न सता,
आँख बंद होए तो ख्वाब न दिखा,
देखा हर लम्हा आँसुओं से,
लिपटी रहे मेरी पलकें, (hindi shayeri)
ऐ ज़िंदगी मुझे इतना न रुला।

हर लम्हा ज़िंदगी गुज़ारते रहे,
खुद को गुमराही में ले जाते रहे।
न जाने किस मोड़ पर आ गए,
हर शौक खुद के भुलाते रहे।
म्हे लम्हे ख्वाब सजाते रहे,
न जाने किस अंधेरे में जाते रहे।
दूर से दिखी रोशनी…
लम्हे लम्हे ख्वाब सजाते रहे,
न जाने किस अंधेरे में जाते रहे।
दूर से दिखी रोशनी, पास आ गए,
उस रोशनी में तो उलझते रहे।(hindi shayeri)
