दिल की शायेरी (DIL KI SHAYERI)
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दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
कभी ख़ामोशियों में भी, एक आवाज़ होती है,
हर मुस्कान के पीछे, कुछ उदासी छुपी होती है।
जो समझ ले दिल की बात बिना कहे,
वो ही तो मोहब्बत की असली मिठास होती है।
दिल की खामोशियों में भी इक साज़ छुपा है,
हर दर्द के पीछे कोई राज़ छुपा है।
कहते हैं वक्त सब भुला देता है,
पर कुछ लम्हों में पूरा अतीत छुपा है।
दिल की भाषा सबको समझ आती नही
आखे बोलती है अक्सर दिल की बातें
दिल लगी तो आसीको के हीससे है
मिलना या न मिलना ये तो तकदीर के किस्से है
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
जखम रिश्ते रहे उम्र भर
वक्त से बेरुखी सी हो गइ
नाम लिख के तेरा आज कयो
उगलीया बर्फ सी हो गइ
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
सबके चेहरे मे वो बात नही होती
थोड़े से अंधेरे से रात नही होती
मागा है मैंने तुझे रातो मे उठकर
अकेला सा लगता हु मै अब
जब तु मेरे साथ नही होती
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
खुद से ही हुई वो बात कया कहु
तेरे बगैर जो गुजरी वो रात कया कहु
दिल ने तो हरपल तुझे याद किया पर
तुझ तक न पहुंचे वो जज्बात कया कहु
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
दिल मे छुपा के रखु तुझे तु मेरी सच्ची चाहत है
पुरे संसार में तुझसा और कोई नही है
तेरे बिना ये दुनिया बस अधुरी सी राहत है
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
खामोशी के लमहे मे भि शोर है
दिल के हर कोने मे तेरा ही जोर है
तरसती है ये आखे तुझे देखने को
खुद को कैसे समझाए तु कही और है
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
दिल की हर धरकन मे बसते हो तुम
मेरी खवाबों की दुनिया में हसते हो तुम
तु तकदिर से मिला कोई तौफा है जैसे
तु कितना खाश है तुझे बताउ मै कैसे
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
दिल मे जो है वो बात कोई है
तुझे पाने की अरमान कोई है
तु हमारा रहे ये मेरी खवाहिश है
तु जैसे खुबसूरत सी शाम कोई है
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
मै जिंदगी का साथ निभाता चला गया
जो कुछ भी मिला नही उसे भुलाता चला गया
तेरे बगैर ही जिना सिख जाए अब ये
मैं दिल को इस मकाम पे लाता चला गया
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
गुजर जाते है ये लमहे मुसाफिरों की तरह
कभी बैठ पास मेरे तो सुनाउ तुझे हाल-ए-दिल
यादे वही रह जाते है रुके हुए रासते कि तरह
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
हाल-ए-दिल बताना नही आता
हमे किसी को तड़पाना नही आता
दिल में जो मोहब्बत है तेरे लिए
कया करु लफजो मे बताना नही आता
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
दिल में एक खवाहिश है तुझे पाने कि
तुझे नजर नह लग जाए जमाने कि
तुझे याद करके फिर से एक बार
दिल ने कोशिश की है मुझे सताने कि
दिल कि सायरी(Dil Ki Shayeri)
जब से देखा है चेहरा दिल को तेरी तलब सी हो गई
तुझे याद करके सोना अब मेरी आदत सी हो गई
तुझे कैसे समझाऊं मैं अपना हाले-ए- दिल
दुआओं में तुझे मांगना मेरी आदत सी हो गई

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