गांव की जिंदगी बहुत खूबसूरत होती है सीधी-साधे और शांति वाली होती है
चंदनपुर नाम का छोटा सा एक गांव था जो Motivational Story बहुत खूबसूरत था यहां लोग सुख शांति के साथ रहते थे इस गांव में समीर नाम का एक लड़का रहता था उसे अपने गांव से बहुत लगाव था समीर गाँव मे सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा लड़का था समीर ने अपनी पढ़ाई शहर में पूरी की थी पढ़ाई पूरी होने के बाद समीर जब गांव आया तो उसने देखा कि उसके गांव के बच्चे दूसरे गांव जाकर पढ़ रहे हैं जिस वजह से उन्हें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है कुछ बच्चे दूर होने की वजह से स्कूल ही नहीं जाते है इस वजह से समीर ने गांव में रहने का ही फैसला कर लिया वह गांव के बच्चों को पढ़ाने लगा कुछ दिनों बाद उसने सोचा कि इस गांव में अगर एक बड़ा सा स्कूल हो जाए और एक अस्पताल भी हो जिसमें फ्री में गरीब या अनाथ लोगो का इलाज किया जाए

इस काम के लिए समीर को किसी के Motivational Story मदद की जरूरत थी उसका एक दोस्त शफी जो शहर में रहता था उसने उससे मदद लेने की सोची शफी से जब बात हुई तो वह इस काम के लिए मान गया शहर में शफी का खुद का एक बड़ा अस्पताल था
समीर ने गांव वालों की थोड़ी सी मदद ली और फिर शफी ने अस्पताल और स्कूल दोनों बनवा दिया स्कूल में गरीब बच्चों के लिए खाना किताबें कपड़े का फ्री में इंतजाम करवा दिया गया अस्पताल में भी गरीब बुढे़ बच्चे सब का इलाज फ्री में होने लग
कुछ दिन बीत गए
सब कुछ सही चल रहा था तभी शफी अपना Motivational Story फायदा सोचने लगा उसने पहले तो स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों से झूठ बोला कि वह उन लोगों को शहर ले जाकर उन्हें नौकरी दिलवाएगा और इधर फिर अस्पताल में अनपढ़ लोगों से अस्पताल के कागज के नाम पर अंगूठे का निशान लेकर उनके जमीन को अपने नाम करवाने लगा समीर को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी वह अपने दोस्त पर बहुत यकीन करता था समीर के माता-पिता भी बूढ़े हो चुके थे जिस वजह से उसे ज्यादा टाइम अपने घर पर ही रहना पड़ता था

फिर एक दिन
समीर को जब यह बात लोगों से Motivational Story पता चली तो वह बहुत परेशान हो गया उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें फिर भी उसने लोगों से तसल्ली रखने को कहा समीर गांव के कुछ लोगों के साथ चुपके से शहर जाने का फैसला किया जब वे लोग शहर पहुंचे तो उनके गांव के बच्चे जो शफी के बात में आकर फंसे हुए थे उन सब का हाल देखकर समीर रोने चिल्लाने लगा उन लोगों से सिर्फ काम करवाया जाता था कुछ बच्चे को होटल मे वेटर किसी से हॉस्पिटल की सफाई तो किसी को किसी के दुकान मे रखा था जितने बच्चे गए थे सबका एसा ही कुछ हाल था समीर यह सब देखकर चुप बैठने वाला नहीं था उसने तुरंत ही पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज करवाया और फिर सारे लोगों को लेकर गांव वापस लौट गया इधर शफी को जेल होगई कुछ दिनों बाद उसके गांव में सरकार की तरफ से एक बड़ा सा हॉस्पिटल और एक बड़ा सा स्कूल भी बनवा दिया गया अब गांव के सारे लोग समीर को गांव का मसीहा मानने लगे समीर भी गांव वालों के साथ खुशी से रहने लगा
Moral
पढ़े-लिखे लोगों को चाहिए की अनपढ़ लोगों को बेवकूफ समझ के उनका फायदा ना उठाए
